मनोभावनाओं के आधार में खो के
जो लिख जाए पन्नों पर हर भाव।
हृदय की तरंगों में लीन हो कर
प्यार को गीत और ग़ज़लों में पिरोए।।
हर छोटी बात का तर्क कर के
उसे सरलता से शब्दों में निचोड़े।।
जीवन की परिभाषा से गहरी सोच रख
दर्द को खामोशी से पन्ने पर उतार
उस सजाने का गुण दिखाए।।
खुशी को आंखो से बयां कर
अपने कविता में परिपूर्णता से बखान करे।।
अपनी मासूमियत से जब टूटे हजार बार दिल
अपने ही दिल को सख्त कर यादों की बारात सजाए
लेखन की भावना से अपने मन का भाव जताए
अपनी ही धुन में खोए रहे औरों को भी अपनी बात सुनाए
लेखक वो रूहानी इंसान है
जो दिल से दुआ और बातों से कविताओं का रस बरसाए
लेखक वो बखेड़ा इंसान है
जो दिल से दिमाग से और गहरी सोच से शब्दों का भंडार
अपने अंतर्बोध में सजाए है ।।
स्वरचित मौलिक रचना
नेहा यादव
लखनऊ उत्तर प्रदेश
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