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"उरी-हमला"

                
                                                         
                            (18 सितंबर 2016)
                                                                 
                            
चलो,सुनते है आज सब
एक कायर भूमि की कहानी
जिसने बेरहमी से छीन ली थी
हमारे वीर-जवानों की जवानी

विधवा कर दिया था उसने
इंतज़ार करती सुहागिनों को
दबोच लिया उन चारों ने
बैरक में सोते सिपाहियों को

निहत्थों पर 3 मिनट में 17 ग्रेनेड फेंके
आँखे बंद करें, 13 जवान तब जिंदा जले
जब सम्भले तो दिया उसने करारा जवाब
19 साल के बहादुर ने किया सबको ख़ाक

अँधेरा हटा,सन्नाटे के सूरज के साथ
बिछी थी लाशें,रँगे थे खून से हाथ
बदले के अँगारे थे,सबकी आँखों में
दुश्मनों को चित्त करा "सर्जिकल-स्ट्राइक"ने

29 सितंबर 2016,उन शहीदों के नाम थी
देश के ख़ातिर जिन्होंने अपनी जान गंवाई थी
एक-एक की जान का बदला था उन 4 घण्टो में
40 को फिर धूल चटा दी, हमारे नौजवानों ने

भारत की वीर भूमि का ऐसे ही नाम रहेगा
जब ऐसे ही फौजी इसका "रखवाला" बनेगा
"उरी हमला" जब-जब ज़हन में आएगा
हर एक हाथ तब सलामी देने को उठेगा
(जय हिन्द

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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