बदली निगाहों ने बताया,ईमानदारी कहां है
पंख कतर ही देता है चूहा,वफादारी कहां है
सिंह कैसे रखाएगा मेमना की जान को
यहां कुत्तों का झुंड है पहरेदारी कहां है
ना जाने क्यूं,ना फर्ज निभाया कोयल ने
राम भरोसे जीवन,यहां जिम्मेदारी कहां है
कहते है नेता जी,सबको रोजगार मिलेगा
यहां ठाली खड़े है गधे रोज़गारी कहां है
कोई कहता है बहरे से गूंगा गाता बहुत है
ना समझ जीवों में समझदारी कहां है
-नीटू मावी
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