के पास मेरे महबूब की तस्वीर नहीं
शायद मेरे हाथों में वो लक़ीर नहीं
हो ना पाया प्यार मुकम्मल मेरा
जाने क्यूं मेरी ऐसी तक़दीर नहीं
में कैसे छुपाता तिज़ोरी में चाहत
मोहब्बत तो खुदा है जागीर नहीं
लूट गया इश्क़ में दिल और दिमाग़
मेरे जैसा शायद कोई फ़कीर नहीं
बस तू ही दवा थी मेरी तू ही दुआ
मैं रांझा हूं तेरा,पर अब तू हीर नहीं|
-नीटू मावी
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