चिंता
ज्यादा चिंता जो करै, रक्त चाप बढ़ जाय।
बिनु अग्नी जीवित जलै, जग में होत हसाय।।
भ्राता
बड़ा भ्राता पिता तुल्य,छोटा पूत समान।
भ्राता से न बैर कभी, दौलत ओछी जान।।
- अशर्फी लाल मिश्र,अकबरपुर,कानपुर।
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