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हमारे लिये ये डेमोक्रेसी का डांस।

                
                                                         
                            क्या भारत क्या इटली और फ्रांस।
                                                                 
                            
एक ही इकोसिस्टम ले रही चांस।
आप बेशक़ अराजक कह लीजिये,
हमारे लिये ये डेमोक्रेसी का डांस।
चीते हिरनों का शिकार कर रहे हैं,
और शेर सारे लुट रहे उनका मांस।
अब फिर अंकल ने टैरिफ रोका है,
उसके छुरे मे तुम ढूंढो न रोमांस।
तुम पेगासस से संसद दहला गये,
अब 200 बंदों का तुम्हे सर्विलांस।
- जयंत दिक्षित
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एक घंटा पहले

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