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जम्हूरियत ख़तरे मे है,क्योंकि मै ख़ुद ख़तरे मे हूं।

                
                                                         
                            ये चौतरफा बैटिंग,ये फील्डिंग आती है कहा से l
                                                                 
                            
बस ये मत पूछो कि ये फंडिंग आती है कहा से l
इस मुल्क मे बाहरियों की पारी तो आसां नही,
पर मुनाफ़िकों की लंबी इनिंग आती है कहा से l
संविधान हाथ में और टिफ़िन बक्से मे है पेट्रोल,
ये बेजोड़ नक्सलपसंद थिंकिंग आती है कहा से l
टार्गेट किलिंग से मरेगा फिर कोई इक़बाल सिंह,
पुलिस बल की ऐसी ये लिंचिंग आती है कहा से l
जम्हूरियत ख़तरे मे है,क्योंकि मै ख़ुद खतरे मे हूं,
मेरे जहन मे मार्क्स की प्लानिंग आती है कहा से।
-जयंत दिक्षित
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35 मिनट पहले

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