हर दरख्त हर साख पर उगे हैं।
हर गली हर नुक्कड़ पे सजे हैं।।
ये अहंकार के गुल हैं नीलम,
हर शख्स हर इंसा में भरे हैं।।
चलो इक नये सवेरे का आगाज करते हैं।
कुछ तुम भूल जाओ कुछ हम भूलने की बात करते हैं।।
तभी तो फसल खुशियों की लहलहा के झूमेगी।
कभी मेरी तो कभी तेरी हथेली चूमेगी।।
आने वाली पौध को एक खामोश संदेश दे जाएं।
अच्छा कुछ याद रखें बुरा सब भूल जाएं।।
चलो लग जाये गले सब शिकवे मिटाकर।
दूरियों के दरद औ गम को हटाकर।
हमारे मुल्क की हर गली हर नुक्कड़ चौराहे पर।
बॉहे पसारे और मोहब्बत हो निगाहें भर।।
आने वाले वक्त को दे ऐसा ईनाम।
जाने के बाद भी दुनिया करे सलाम।।
जो औरों के हित जिए वही सफल इंसान।
जान तो जन्तुओं को भी देता है भगवान।।
नीलम यादव यदु कानपुर नगर
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