हम चरा़गों की तरह जलते रहे रौशनी के लिए।
तमाम उम्र गुजार दी जिनकी खुशी के लिए।
आज तक दुवाओं मे जिनकी खैरियत मागी,
वही इल्जाम लगाते हैं बेरूखी के लिए।
हम
हर मोड़ पर साथ निभाया अब तक हमने,
सजा़ दे दी हमें घर छोड़ने के लिये।हम----
अश्क ऑखों से अब रूकते ही नहीं,
दरद दिल का क्या करे छुपाने के लिये।हम---
शिकवा भी करे तो किससे करे हम,
कोई नहीं है अपना कहलाने के लिए।।हम चरा़गों की तरह जलते रहे रौशनी के लिए
नीलम यादव यदु कानपुर नगर
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