*माँ दुर्गा की महिमा*
नौ रूपों का दिव्य उत्सव,
माँ की महिमा अपार है,
भक्ति, शक्ति और श्रद्धा से,
महकता जग-संसार है।
शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक,
हर रूप माँ का प्यारा हैं,
भक्ति-भाव से जो शीश झुकाएँ,
माँ उसके कष्टों को निवारा हैं।
महिषासुर का गुरूर तोड़ा
चण्ड-मुण्ड पर वार है,
दुर्गा के पाकीजा रूप में,
नारि शक्ति की हुंकार है।
मिट जाए नफ़रत का अँधियारा,
हर हृदय में न्याय जगा दो,
हे माँ! अपने रहमत नूर से,
मानवता का दीप जला दो।
नारी की गरिमा से रोशन,
देश का हर धाम रहे,
न्याय, प्रेम और समता से,
ऊँचा प्यारा हिंदुस्तान रहे||
- नीलम सरोज 'खुशबू'
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