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कान्हा की बांसुरी

                
                                                         
                            कान्हा की बांसुरी के तीन गुण
                                                                 
                            
कान्हा की बांसुरी हमें हमको सिखाएं
बांसुरी में कोई गांठ नहीं होती, अपने मन में तुम कोई गांठ न रखो
यह गांठ यह गांठ( बदले की भावना) मन को जलाती है
कान्हा की बांसुरी बिना बजाई नहीं बजती है
हमको यह सिखाती है नहीं जरूरत मत बोलो जब बांसुरी बजती है कान्हा की
मधुर ही बजती है सबके मन को भाती है
जब भी मुख खोलो भाई बहनों मीठा ही बोलो
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एक घंटा पहले

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