आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शायरी

                
                                                         
                            शायरी
                                                                 
                            

मेरा ख़्याल रखो,
मेरे बाद रखो,
मेरे पहले रखो।

तुम्हारे में मैं ज़िंदा रह गया,
ये ख़्याल मेरे सिरहाने रह गया।

कायर कह गई तुम,
घायल कर गई तुम,
हुस्न का अपने तुम शायर,
कर गई तुम।

तुम ख़ास हो,
तुम आस हो,
तुम पास हो,
तुम मीठा-सा एहसास हो।

तुम्हारा पास आना,
तुम्हारा मुझमें समाना,
फिर दूर जाना,
फिर मुझसे बात न करना,
मुझे बहुत खलता है।

मधुशाला पीने के मौसम में,
हम बस पानी पी रहे हैं।
तुम मेरी हों ये सोचकर,
हम कहानी लिख रहे हैं।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर