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तो पीछे कोई अधूरा हिसाब न रह जाए।

                
                                                         
                            मेरी आख़िरी ख़्वाहिश बस इतनी है…
                                                                 
                            

ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं,
बस कुछ हिसाब अभी बाकी हैं,
कुछ अपनों के कर्ज़ चुकाने हैं,
कुछ गैरों के एहसान बाकी हैं।

जाने से पहले इतना कर जाऊँ,
किसी के दिल पर मेरा कोई बोझ न रह जाए,
जिनका हक़ है मुझ पर, वो लौटा दूँ,
और किसी की आँख में मेरी वजह से आँसू न रह जाए।

बस भगवान से इतनी सी दुआ है—
मेरे हिस्से के सारे कर्ज़ पूरे हो जाएँ,
और जब भी मेरी ज़िंदगी का सफ़र पूरा हो,
तो पीछे कोई अधूरा हिसाब न रह जाए।

 
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34 मिनट पहले

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