कितने नाज़ुक और मौसमी हैं,
सर्दी, गर्मी, बरसात की तरह बदल जाते हैं लोग।
इनके जीवन-व्यक्तित्व की कीमत क्या ही आँकूँ,
फूलों के एक गुलदस्ते में बिक जाते हैं लोग।
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