बीत गया सो बीत गया फिरसे बहाल किया नहीं जा सकता
माज़ी को मुड़ कर देखा जा सकता है जिया नहीं जा सकता!
येह जो पल है यही तो जीवन है इस को जी भर कर जी लो
मुस्तक़बिल ना जाने कैसा हो यकीन किया नहीं जा सकता!
-एन. आर. कस्वाँ
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