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तू ही सबका जज

                
                                                         
                            तू ही सबका जज
                                                                 
                            

या रब
सबमें तू
तुझमें सब

क्या मालूम
किस हाल में
मिल जाए कब

कल भी तू
आज भी तू
तू ही अब

जल में तू
थल में तू
तू ही नभ

तेरा ही जलवा
तेरा ही फतवा
सुनादे चाहे जब

क्या है सच्चा
क्या है झूठा
तू जाने सबकासब

तू ही काशी
तू ही काबा
तूही सबका हज

तेरी वकालत
तेरी अदालत
तूही सबका जज

तू ही मेरा
तू ही उसका
तूही सबका सब

कायनात में तू
हर बात में तू
तूही रोज-ओ -शब

यारब सबमें तू
तुझ में सब
सबका तूही रब

एन.आर.कस्वां
२५.९.१८
गतवर्ष


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6 वर्ष पहले

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