ज़माने में कुछ भी तो नित्य निरंतर शाश्वत चिरस्थाई दाइमी अब्दी और लाज़वाल नहीं है
हासिल-ए-सुकून-ए-हयात यहाँ उसी को है किसी हाल में जिसे कोई रंजो-मलाल नहीं है
-एन. आर. कस्वाँ
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