बैसाखियों का सहारा छोड़ो अपने पैरों पर खुद उठो
अपनी ज़िंदगी खुद जियो अपनी कहानी खुद लिखो!
झूठ के पांव नहीं होते सच आख़िर तक साथ देता है
अपनी कलम से जो भी लिखो सच और शुद्ध लिखो!
-एन आर कस्वाँ
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