घर से होकर दरबदर कई घर किए हमने
एक मुसाफ़िरत में कई सफ़र किए हमने
शहर - शहर घर नया खड़ा करने के लिए
टूटे हुए जिगर के टुकड़े पत्थर किए हमने
- एन. आर. कस्वाँ
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