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क़िस्मत की लकीर

                
                                                         
                            जो शख़्स जानिब-ए-मंज़िले-ए-मक़्सूद चल देते हैं
                                                                 
                            
वो शख़्स खुद अपनी क़िस्मत की लकीरें बदल देते हैं!

मुकाम- ए- सफ़र अपना खुद तय करने वाले लोग
राहे-सफ़र भी अपना खुद ही तय करने पर बल देते हैं!
-एन. आर. कस्वाँ
 
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एक घंटा पहले

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