रुकने की ना कोई वज़ह तलाश यहाँ से जाने के न बहाने ढूंढ,
जिस मिट्टी से बना है मन लगा मन बहलाने के न ठिकाने ढूंढ!
येह दुनिया येह ज़माना लिख दिया गया है नसीब में तेरे "बशर"
अब और कोई न दुनिया तलाश अब और कोई न ज़माने ढूंढ!
-एन. आर. कस्वाँ
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