आता है मुझ को अपने रक़ीब से निपटना
हबीब से हिफ़ाज़त मिरी या रब तू करना!
हैं वाकिफ़ हर चालसे अपने रक़ीब की हम
फ़िक्र दोस्ती की है दुश्मनी से क्या डरना!
- एन. आर. कस्वाँ
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