आपके किरदार को मुक़म्मल तौर पर तो कोई भी नहीं देख पाएगा
जिसको जिस हदतक उसकी नज़र दिखाएगी उतनाही देख पाएगा
-एन. आर. कस्वाँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X