पहचानकर हालाते-हयात और वक़्त के लम्हात की
हक़ीक़त और असलियत बदल ले अपनी नीयत,
किसी के अक़्ल-मंद होने का पैमाना है उस की
खुदको बदल लेने की क़ाबिलियत और सलाहियत!
-एन आर कस्वाँ
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