बादलों ने बारिश का पैगाम भेजा है
उसके सूखते लभों के लिए जाम भेजा है।
नशे में जी भर के झूम ले आज
घुंघरूओं के बंधनों को उतार फेंका हैं।
सारी दुनिया तैयार है मुझे सताने को
तू जल्दी से आजा मुझे हंसाने को।
काली घटाओं के अंधेरे डराने लगे हैं
तू जल्दी से आजा हुस्न की चांदनी बिखराने को।
तेरे वादे पे एतबार किए बैठे हैं
हम तो बरसों से इंतजार किए बैठे हैं।
तू दूर कर दे मेरे घर की वीरानियों को
ये आखरी आस तुझसे लगाये बैठे हैं।
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