मे खुश रहूँ अब ये दुआ कोई नहीं देता
माँ नहीं हे तो सुलह का मशविरा कोई नहीं देता।
घर मे अब नफरत की दीवारे उठने लगी
परिवार को एकता की दवा कोई नहीं देता।
हर एक शख्स हे अब घर मे तन्हा तन्हा सा
माँ नहीं हे तो अब सहारा कोई नहीं देता।
कोन किससे पूछे कहाँ हालचाल अब
रिश्तों को मजबूती की हवा कोई नहीं देता।
माँ गई तो प्यार करने वाला चला गया
माँ के जैसा प्यार बेपंहा कोई नहीं देता।
- नरेन्द्र निडर
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X