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बहुत रोती है, कहती है - "मेरे बिना कैसे रह पाएगी।"

                
                                                         
                            मेरी माँ
                                                                 
                            
शुरू से देखा मैंने, माँ को अकेले लड़ते,
पापा के हिस्से के ग़म भी वो चुप-चाप सहती,
खुद को संभाल लेती है, सब खुद निपटा देती,
ताकि पापा को कोई परेशानी न छू पाए।
प्यार से समझाती है, जब पास बिठाती है,
पर गुस्सा भी उसका है, पल में आ जाता है,
गुस्से में अक्सर उसकी तबीयत बिगड़ जाती है,
और जब वो रोती है, तो मुझे भी रुला जाती है।
प्यार वो करती है बे-हिसाब, हम तीनों से,
मुझसे, पापा से, और मेरे भाई से,
डांट देती है इसलिए, राह भटके नहीं,
कोई गलती हमसे कभी हो जाए नहीं।
कोई कुछ कहे उससे पहले, सब समझ जाती है,
बिना बोले ही दिल की बातें पढ़ जाती है,
बहुत प्यारी है वो, सबसे प्यारी है वो,
मेरी दुनिया, मेरी माँ, बहुत ही न्यारी है वो।
एक ही उम्मीद उसने, मुझसे ही लगाई है,
कहेगी बेटी मेरी, नाम रोशन कर जाएगी,
पर विदाई देखे किसी की, तो खो जाती है,
बहुत रोती है, कहती है - "मेरे बिना कैसे रह पाएगी।"
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एक घंटा पहले

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