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तीक्ष्ण गर्मी

                
                                                         
                            अब सुबह की अहसास खत्म हो गई
                                                                 
                            
सूरज बनी है आग का गोला
फिजाओं में सुखद अह्सास खत्म हो गई
दिन तो दिन है
भाई रात की अहसास खत्म हो गई
क्या हुआ है जनाब सूरज को
क्यों आग बरसा रहें हैं ?
हमसे बहुत सारी गलतियां अवश्य हुई है
हमने जंगलों मैदान जरुर बना दिया है
हमारी मजषूरी भी सुनो
आजकल बिना बिजली कोई भी रह सकता है क्या?
बिजली बनाने के चाहिए कोयला
कोयला की खानें जंगल में मिल रही हैं
बिन बिजली सब सून
कल-कारखाने बंद हो जायेगीं
लोगों की नौकरियां खत्म हो जायेगीं
देश की तरक्की में रुकावट आ जायेगी
लोग-बाग भूख से मरेगें
हम लोग वृक्ष लगा रहे हैं
हमें अब गल्तियों अहसास हो रहा है
हम उर्जा के अन्य संसाधन ढूंढ रहे हैं
सूरज महराज अब आपके किरणों से बिजली पैदा कर रहे हैं
हे प्रभु हमको कुछ तो राहत दिजिए
कम से कम अपने "तीक्ष्ण गर्मी" धोडा कम कर दिजिए
हे सूरज महराज कुछ तो रहभ कीजिए
- भागवत प्रसाद नायक
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3 महीने पहले

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