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प्रातःकाल गौरैया की चहचहाहट

                
                                                         
                            मैं बचपन में अक्सर पेड़ों में गौरैया की चहचहाहट सुनी थी
                                                                 
                            
छोटी सी, प्यारी सी गौरैया को घर मे घोसला बनाते देखा थी
अब कहां खो गई छोटी सी, प्यारी सी गौरैया दिखती नहीं
वातावरण के जहरीले, दूषित पर्यावरण को दूषित हो गई
गौरैया समेत बहुत पशु-पक्षी इस धरती से विलीन हो गई
क्या हमारा बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां पर्यावरण दूषित कर रही हैं ?
मुख्य कारणों मे से एक है, दूजा अंधाधुंध भवन निर्माण
कस्बे शहर बन गये, शहर महानगर यह सब ईटों और क्रांकिट का जंगल गांव, कस्बे, शहर ,महानगर फैल रही है
मानवों की अत्यधिक भीड़तंत्र शहरों को गंदा कर रही है
बिमारियों का फैलना का काम मानव समूह कर रही है
मानव सुरक्षित नहीं,तो सर्वप्रथम पक्षीयों नहीं है ठिकाना
छोटी सी प्यारी सी को न घर.में,न बगिया नहीं है ठीकाना
खो गई?छोटी प्यारी सी गौरैया क्या मिलगा ठीकना
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5 महीने पहले

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