अनादि, अनन्ता , अजन्मा है वो
नाम हैं अनेकों, पहचान बस एक।
दुविधा नहीं कोई, संशय से दूर
उपस्थित हमेशा, अदृश्य है वो।
बात है छोटी फिर भी विस्तार असीम
संयम दिखलाता, विश्वास है वो।
अनादि, अनन्ता , अजन्मा है वो
नाम हैं अनेकों, पहचान बस एक।
-नाग मणि
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