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अंदाजा नहीं

                
                                                         
                            बीते पल को सब ने देखा
                                                                 
                            
अगला पल अनजान रहा।

गुबार को उठते दूर से देखा
बड़े यत्न से मौज सॅंवारा, मस्ती वाले अनजान रहे।

मुस्कुराने की अदा बयां करते रहे
नयनों की उदासी से अनजान रहे।

दीवार की दरार का जिक्र चलता रहा
रिश्तों के दरार का अंदाजा नहीं लगा ।

टहनी के चटकने से चौंक गये सारे
दिल टूटने की आहट भी नहीं आई।

मैं की चर्चा में डूबे गये देखते-देखते
साथ की बात भूल गये अपने मैं के आगे।
-नाग मणि
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41 मिनट पहले

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