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शब्द और अर्थ हम तुम जानते हैं।

                
                                                         
                            शब्द और अर्थ हम तुम जानते हैं।
                                                                 
                            
विश्वासघात में ही विश्वास होता हैं।
प्रेम प्यार चाहत में विश्वासघात हैं।
युग बीते बस यही शब्द रहते हैं।
नीरज विश्वासघात लिखते हैं।
तेरे मेरे मन भाव में रहते हैं।
विश्वास में विश्वासघात कहते हैं।
आज या बीते कल मन भाव है।
बस फल हर व्यवस्था का मिलता हैं।
विश्वासघात एक सच का पाप होता हैं।
हम तुम दोस्त बन विश्वासघात करते हैं।
ईश्वर कुदरत सब कुछ देखते देते हैं।
जीवन और जिंदगी में आओ सोचते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
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2 घंटे पहले

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