आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शीर्षक - तेरा मेरा मन.... सोच

                
                                                         
                            तेरा मेरा मन ही तो सच है।
                                                                 
                            
सच ही तेरा मेरा मन भाव है।
भाव से सोच हमरी होती है।
यही तो तेरा मेरा मन होता हैं।
नीरज तेरा मेरा मन लिखते हैं।
प्यार चाहत छल फरेब होते हैं।
लबों का बुदबुदाना मन कहता हैं।
मन में उमंग तेरा मेरा प्यार होता हैं।
यही तेरा मेरा मन एक सोच होती हैं।
न तुम न हम बस वो लम्हा रहता हैं।
हां सच तेरा मेरा दिल धड़कता है।
शायद यही तेरा मेरा मन मचलता है।
आधुनिक रंगमंच तेरा मेरा मन रहता है।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
16 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर