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शीर्षक - सोच

                
                                                         
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एक सोच मन भाव होती हैं।
प्रेम प्यार चाहत सच होते हैं।

एक सोच हमारी अपनी हैं।
हां कल हम सब मिलते हैं।

बस यही एक सोच रहती हैं।
हर पल लम्हा सब लिखा हैं।

हां सच हम एक सोच रखते हैं।
नीरज शब्दों में बस लिखते हैं।

हम सब रिश्ते नाते एक सोच है।
बस हम रंगमंच के किरदार हैं।

आज ही हम सब जीवन जीते हैं।
कल और पल हमें न कुछ पता है।

हां सच हम सब एक सोच रखते हैं।
यही तो जिंदगी भर हम करते हैं।
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नीरज कुमार अग्रवाल (लेखक) चंदौसी उत्तर प्रदेश
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7 घंटे पहले

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