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शीर्षक - रक्षाबंधन

                
                                                         
                            भाई बहन का सच रक्षाबंधन हैं।
                                                                 
                            
आधुनिक समय और हालात हैं।

मन भाव में प्यार बस रखना हैं।
हां रक्षाबंधन पर्व हमें मनाना हैं।

जीवन के पल धागों के संग बंधें हैं।
नीरज रक्षाबंधन पर्व लिखते हैं।

सच ईश्वर कुदरत सब देखते हैं।
सांसों के रिश्ते नाते निभाते हैं।

हां बीते पल लम्हें हम तुम भूलते हैं।
हाथ में उम्र प्यार का रक्षक बांधते हैं।

भाई की बहन आरती तिलक करतीं हैं।
रक्षाबंधन पर्व को हंसी खुशी मनाती हैं।

रीति रिवाज और हम सब जानते हैं।
प्रेम प्यार मान सम्मान का रक्षाबंधन हैं।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
44 मिनट पहले

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