शीर्षक - माँ गौरी के लाला
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माँ गौरी के लाला नाम गणेश प्यारे हैं,
प्रथम पूजनीय मूषक वाहन न्यारे हैं।।
मस्तक पर तिलक लडू का भोग लगे हैं ।
बुद्धि के देवों में महिमा अति दुलारी है।।
नाम जपे एकदंत गजानन विध्न हर्ता है।
विघ्न हर्ता सुख दाता माँ गौरी के लाला है।
शुभ लाभ संग ऋद्धि सिद्धि रहते हैं।
गणपति बप्पा मोरया मंगल मूर्ति हैं।
भोले बाबा-पार्वती माँ गौरी के लाला है।
हां शुभ मंगल कार्य प्रथम नाम लेते हैं।
मा गौरी के लाला भक्तों के विध्न हर्ता है।
हम सब शुभ लाभ रिद्धि सिद्धि संग पूजते हैं।
हर वर्ष की भांति हम सब गणपति घर लाते हैं।
सस हम सब रीति रिवाज के साथ धर्म निभाते हैं।
गणेश चतुर्दशी हम सब धूमधाम से मनाते हैं।
अंनत चौदस को हम सब विसर्जन करते हैं।
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