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शीर्षक - मां चंद्रघंटा

                
                                                         
                            तृतीय दिवस माँ चंद्रघंटा का पूजते है
                                                                 
                            
हां माथे पर सजा अर्धचंद्र बड़ा न्यारा है।
सिंह सवारी मुस्कान निराली लगती है।
हम भक्तों को कृपा पल पल मिलतीं है।
मां तेरे माथे की बिंदियां सुहाग वर देती है।
नीरज शब्दों भजन मां चंद्रघंटा गाते हैं
मां के हाथों में अस्त्र शस्त्र रक्षा करते हैं,
जय जय मां सभी भक्ति भाव से गाते हैं।
हां हम अज्ञानी तेरा भजन मुक्तक गाते हैं।
श्रद्धा सुमन तेरे चरणों में हम सब चढ़ाते हैं।
भोग खीर दूध का प्रेम से समर्पित करते हैं।
अब मेरी भी सुन लो पुकार सदा करते हैं।
हम बालक नादान माता तुम्हारी दया हैं।
हां भक्ति से जीवन में मां सच राह चलते हैं।
तेरी भक्ति और श्रद्धा से हम सब सुख पाते हैं।
आओ हम माँ चंद्रघंटा के चरणों में वंदन करते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल 
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एक घंटा पहले

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