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शीर्षक जय मां स्कंदमाता

                
                                                         
                            नवरात्रे में पंचम रूप स्कंदमाता पावन नाम है।
                                                                 
                            
मां गोद में कार्तिकेय संग ममता का संदेश है।
जय जय मां स्कंदमाता पावन नाम जपते हैं।
नीरज मां स्कंदमाता का पावन गुणगान करते हैं।

मां कमल आसन पर बैठ पद्मासना कहलाती है।
सच शेर सवारी माता हम भक्तों के घर आती है।
जय जय जयकार भक्त हमसब मिलकर लगाते हैं।
मन भाव के साथ हम सब श्रृद्धा कपूर जगाते हैं।

मां स्कंदमाता चार भुजा रूप आकर्षक लगता है।
हां हाथों में स्कंद सोहे हाथ कमल पुष्प रहता है।
मां की नजर सब भक्तो के मन कर्म वचन रहते हैं।
न छल फरेब स्वार्थ मां के मन से हम तुम छिपे हैं।

मां तेरे चरणों में शीश नवाऊं गुणगान गाते हैं।
भोग हम सब मन भाव कदली फल मेवा लगाते हैं।
हम भक्तों को सच्चे मन संतान सुख मां देती हैं।
हम सब संसार तुम्हरा मां हम सबकी मां न्यारी है।

माता गोद वो सबकी भर मन मुरादें पूर्ण करती है।
अब सूनी गोद भर दो मां हर नारी सुख मां पाती है।
भक्तों के भक्ति भाव को मां सब पहचान जातीं हैं।
जय जय स्कंदमाता सब जय जयकार लगाते हैं।
 
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1 hour ago

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