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शीर्षक - आजकल.... बहाना

                
                                                         
                            आज-कल हम करते हैं।
                                                                 
                            
आधुनिक समय होते हैं।

आज-कल बहाना करते हैं।
जिंदगी में सच कहां होते हैं।

बस, आज-कल बहाना करते हैं।
संघर्ष के नाम से वो डरते हैं।

सच तो राह न आज -कल होती हैं।
हम तो आज और अभी कहते हैं।

नीरज संदेश कविता से देते हैं।
न आज- कल कभी वो कहते है।
-नीरज कुमार अग्रवाल
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2 घंटे पहले

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