मुफ़लिसी की बात मत पूछो
मुफ़लिस से बात मत पूछो
गुजर रहे हैं अभावों में दिन
खाली पेट दिल की बात मत पूछो
तन्हाई में रोने लगा है मन
सामने ख़ुशी की बात मत पूछो ।
मुफ़लिसी में कैसे गुजरे दिन
सुबह-सुबह हंस कर बात मत पूछो ।
दो वक्त रोटी को तरसते हैं रोजाना
नसीब बदलने की बात मत पूछो ।
हाले दिल ब्यां 'चांदनी' क्या करें
मुफ़लिसी में बीते दिन कि बात मत पूछो ।
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