वक़्त की किताब में
हर पन्ना एक सबक है,
कुछ पन्ने मुस्कान देते हैं,
कुछ आँखों को नम कर जाते हैं।
किसी पन्ने को फाड़ना मत,
हर अध्याय का अपना अर्थ है,
जो कल पीड़ा था जीवन में,
कभी वही सबसे बड़ा ज्ञान बनता है।
हम आगे बढ़ते जाते हैं,
पर पीछे बहुत कुछ छोड़ आते हैं,
और अंत में समझते हैं—
यात्रा मंज़िल से अधिक
हमें स्वयं से मिलाती है।
हर शब्द का अर्थ नहीं होता,
कुछ बातें मौन कह जाता है,
जो आँखें कभी कह नहीं पातीं,
उन्हें समय समझ जाता है।
हम उम्र भर बोलते रहे,
अपने होने का प्रमाण लिए,
फिर एक दिन समझ आया—
अस्तित्व को शब्दों की आवश्यकता नहीं।
-मुनीर शमी
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