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इश्क़ की उम्रकैद

                
                                                         
                            तेरे इश्क़ की अदालत में कुछ यूँ मेरा मुक़दमा चले,
                                                                 
                            
कि हर दलील मेरे ख़िलाफ़ उठे, हर फ़ैसला तेरे हक़ में हो।
तेरी मोहब्बत का ऐसा गुनहगार ठहरूँ मैं,
कि मेरी वफ़ा को भी बेगुनाही का कोई सबूत न मिले।
थक जाएँ ज़माने के सारे वकील मेरी रिहाई की ख़ातिर,
मगर तेरी चाहत की क़ैद से मुझे कभी ज़मानत न मिले।
और जब मौत भी मेरी रिहाई का आख़िरी फ़रमान लिखे,
तो मेरी रूह भी यही दुआ करे—हर जन्म तेरे इश्क़ की उम्रकैद मिले।
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52 मिनट पहले

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