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एक-दूजे को प्रेम से गले लगाएँ।

                
                                                         
                            आँधियारों से लड़कर
                                                                 
                            
एक दीप जलाना है
मिलजुल कर दीवाली पर्व मनाना है।

नफरत के इस दौर में,
प्यार का पुष्प खिलाना है
हर घर-आँगन महकाना है।

माँ लक्ष्मी का वरदान
धन-धान्य से हर झोली भर जाये
प्रत्येक उदास मन की मनोकामना पूरी हो जाये।

सत्य की विजय होती सदा
झोपड़ी-महल का भेद मिटाकर
रामराज्य का स्वप्न करें साकार।

आओ एक दीप जलायें
मिलजुल कर दीपावली मनाएँ
एक-दूजे को प्रेम से गले लगाएँ।

-मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
 
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2 घंटे पहले

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