न ला सको गुलाब तो कोई बात नहीं ,
संग अपने मुस्कुराहट ले आना ।
न ला सको कोई महंगा तोहफ़ा तो कोई बात नहीं,
संग अपने दिल में बेशुमार तारीफें ले आना ।
न ला सको सितारों से सजी साड़ी तो कोई बात नहीं,
संग अपने प्रेम का दुशाला ले आना ।
जानती हूं बहुत भीड़ होगी गुलाब की दुकान पर,
संग अपने बाज़ार से जलेबी सी मिठास ले आना ।
ये प्रेम अपना नहीं किसी महीने का मोहताज,
संग अपने तुम ..बीते दिनों का इश्क ए हार ले आना ।
मैं खिलाऊं इस उमर में भी तुम्हारी पसंद का खाना,
संग बांहों के झूले में मुझे तुम झूला जाना ।
माना कि बालों में सफेदी सी छा गई है अब
मगर ....
वक्त को ठोकर मारकर जवां दिल ले आना।
- मोहिनी गुप्ता
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