बेतरतीब सी है ज़िन्दगी
बदलती क्यूँ नही
हिम्मत भरी है फिर भी
संभलती क्यूँ नहीं
रोज गमो से लड़कर
सीखा था मैने जीना
ज़िन्दगी मे खुशियों के फूल
खिलती क्यूँ नहीं
कब तक सतायेगी मुझे
ये ज़िन्दगी भला
कब मौत से मिलायेगी
ये ज़िन्दगी भला
हालात बदल कर मेरा
कब हंसायेगी मुझे
ज़िन्दगी खुशनुमा साल
दिखाती क्यूँ नहीं
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