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योग

                
                                                         
                            योग कर्म है मेरा,योग धर्म है मेरा
                                                                 
                            
योग है तपश्या, योग मर्म है मेरा

तन मन में ऊर्जा का संचार करती योग है
बीमारियों को रोकने की शक्ति बस योग है

शरीर के हर अंग को, अनुलोम और विलोम से
आसन के हर रुप से स्वस्थ करती योग है

योग कर्म, योग धर्म, योग है तपश्या
शरीर को स्वस्थ रखने का यह प्रयोग है

राज योग,भक्ती योग, ज्ञान योग कर्म है
अष्टांग योग का नियम योग का ही धर्म है

मन प्रसन्न तन प्रसन्न योग का प्रसंग है
इन्द्रियों को वश मे करने का एक ढंग है

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर
रोगों से योग करता रहता द्वन्द हैं

योग कर्म है मेरा,योग धर्म है मेरा
योग है तपश्या, योग मर्म है मेरा


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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