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उड़ने का है मन मेरा

                
                                                         
                            हवाई जहाज में बैठ कर उड़ने का है मन मेरा
                                                                 
                            
धरती छुकर आसमान को छूने का है मन मेरा
कौतुहल है मन मे मेरे , दिल जोश से भरा हुआ
परिन्दों जैसे आसमान में उड़ने का है मन मेरा

उड़ते हुए आसमान से नीचे धरती देखना मन मेरा
छोटी सड़कें, नदियां छोटी, हर चीज़ देखना मन मेरा
ऊँची ऊँची इमारतों का कद भी बौना दिखता है
ताकतवर इंसानो का कद आज देखना मन मेरा

सूरज के नजदीक जाकर मिलने का है मन मेरा
बादल हाथों में लेकर बारिश करने का है मन मेरा
मन का मौजी बनकर इठलाने का दिल करता है
आसमान की चादर पर सो जाने का है मन मेरा

सपनों की दुनिया जन्नत में बसने का है मन मेरा
चाँद पर जाकर चन्दा से मिलने का है मन मेरा
पुच्छल तारा आसमान में चमकीला क्यों दिखता है
नील आसमान में घूम कर चिल्लाने का है मन मेरा


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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