ट्रक पर बैठ कर चलने की जिज्ञासा का अंत हुआ
आलू प्याज लदे हुये ट्रक से मैं घर की ओर निकल पड़ा
रास्ते भर सड़क पर मंजिलो को मैं तकता रहा
घर की दहलीज जल्दी आये के लिये मचलता रहा
माँ से मिलने की ख़ुशी मन मे उमंग भर देती है
माँ के हाथ का खाना तन मे जादू सा कर देती है
जन्नत माँ के पाँव तले है कहते सारे पीर फ़कीर
माँ बच्चों की तकलीफों को छुमन्तर कर देती है
घर पहुँच कर नाचुंगा आंगन मे दिल खोल कर
बारिश भी करवाऊंगा टन्की का पानी खोल कर
माँ के हाथ की रोटी खाकर हाहाकार मचाऊंगा
आँचल में सर रख नींद करूँगा पूरी मैं दिल खोल कर
घर पर भाई बहनों से बात करूँगा खूब मैं
भाभी के हाथों से बनवाऊंगा कुछ चीज मैं
बच्चों के संग धमाचौकडी पूरे घर में करना है
दोस्तों से मिल कर करवाऊंगा दावत मैं
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