करता है अट्ठाहस
तूफान धरती पर
बंगाल रो रहा है
उत्कल है भयभीत
प्रकृति के शक्ति के आगे
नहीं चलती कोई नीति
हृदय विदारक घटना से
होता मन भयभीत
हो कैसे इसका समाधान
हो कैसी इसकी नीति
जान बचे जनमानस का
हर सुविधा अंगीकृत
ईश्वर की महिमा पूरी अपरम्पार
चाहे तो वह कर दे सबका ही कल्याण
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