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तूफान

                
                                                         
                            करता है अट्ठाहस
                                                                 
                            
तूफान धरती पर
बंगाल रो रहा है
उत्कल है भयभीत
प्रकृति के शक्ति के आगे
नहीं चलती कोई नीति
हृदय विदारक घटना से

होता मन भयभीत
हो कैसे इसका समाधान
हो कैसी इसकी नीति
जान बचे जनमानस का
हर सुविधा अंगीकृत
ईश्वर की महिमा पूरी अपरम्पार
चाहे तो वह कर दे सबका ही कल्याण

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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