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सोचा था इंसान बनूँगा

                
                                                         
                            सोचा था इंसान बनूँगा
                                                                 
                            
सबके दुख को दूर करूँगा
उड़ने के सपने दिखला कर
मन शक्ति भरपूर भरूँगा

सबको न्याय दिलाने का
मुस्कान मुख पर लाने का
ग्यान नेत्र को जगाने का
कार्य सदा परिपूर्ण करूँगा

ओजस्वी मन जीवन हो
प्रेम सुधा सा बचपन हो
सब डूबे सुख सागर मे
मन को मैँ विभोर करूँगा

नकारात्मकता दूर रहे
ऊर्जा ही परिपूर्ण रहे
मुश्किल रस्ते पर चलने की
हिम्मत मैँ भरपूर भरूँगा

स्वर्ग सा सुन्दर होगा जीवन
कुशल छेम मानव का वास
सत्यनिष्ठ, कर्तव्यपरायण
जीवन मे उल्लास भरूँगा।
 
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4 वर्ष पहले

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